Sunday, 13 April 2014

How to use your self-healing power ?

Perfect harmony among mind, body and soul is what everybody needs. Whenever any pains occur, be it emotional, physical or mental – the only question that arises is how to heal yourself. There can be various ways of healing, what way suits you can be best decided by you. Nobody is a better judge than you. There are various medicines that exist but the best and the most effective antidote to any pain is the healing power within you.
All of us have an ‘inner power’ which is a strength within self that play an active role in healing us. This inner power works parallel to the external healing approaches that we adopt. An individual who cut his figure puts a band aid on the finger but that band-aid is really healing the wound? The answer is surely no as that band-aid is simply providing a support to the wound but actually it is one’s own inner healing power that heals the wound. The next question that will arise is how to use your self healing power ?   A very critical question the answer of which again happens to be very subjective.
Each individuals has their own unique way of healing.  Variety of techniques are developed and formed by the people but one thing which is required by all is the commitment. The commitment to heal self is very essential as in its absence the smallest of the problem or injury does not heal. There are various ways which can be adopted by the individual to support their healing. These ways can be self-guided meditation, counseling by positive affirmation or creative visualization to view onself totally healed and happy.
How to use self healing power has always been a thought that rules the mind in getting the most positive results for self. However, at certain times it is also seen that the self healing power fails in certain circumstances. Such situations are mainly accounted for when the person is under undue stress. The tension in one’s life plays the major role. Also it is seen that the fear and self-doubt distracts and derail the self healing powers of an individual.
The unwavering desire to lead a healthy, wealthy and happy life is the key ingredient for self-healing powers. It works for all – young and old. The self-healing powers have led to miracles in many critical situations. If you feel helpless or victim of any life situation, seek advice from experts at Hope Academy.
Call us @9999897931 or email: info@thehopeacademy.co.in to get free advice on how to realize and put to use your self healing powers.

Wednesday, 12 February 2014

कलर थेरेपी कैसे काम करती है?

कलर थेरेपी वैकल्पिक चिकित्सा का एक रूप है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ करने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। रंगों द्वारा स्वास्थ्य विकारों की वजह से हमारे भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक स्तर पर हुए ऊर्जा असंतुलन को बहाल करने काम किया जाता है। हम रोजाना विभिन्न प्रकार के बहुत सारे रंग देखते हैं। प्रत्येक रंग हमारे मन पर अलग ढंग का प्रभाव डालता है, जैसे- खुशी, उदासी , अवसाद , गर्मी , शांति , क्रोध और जुनून आदि।

पल-भर ठहरकर सोचिए और बताइये कि पृथ्वी पर जीवन के सभी रूपों के लिए ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत क्या है? जी हां – यह सूर्य का प्रकाश है, जो कि अलग-अलग तरंग-दैर्ध्यों से निर्मित है। सूर्य के प्रकाश का हम पर चिकित्सकीय प्रभाव पड़ता है, खासकर सर्दियों के दौरान हम देख सकते हैं कि धूप में हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका पर कितना अच्छा प्रभाव पड़ता है। दृश्य प्रकाश के पूरे स्पेक्ट्रम में लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, आसमानी और बैंगनी यानी सात प्रकार के रंगों का अलग-अलग तरंग दैर्ध्य होता है। हरेक रंग की अपनी अलग कंपन-आवृत्ति है और यह हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों के साथ विशेष ढंग से जुड़ा होने के कारण उन सब पर विभिन्न संयोजनों में मिलकर विशेष प्रकार से प्रभाव भी डालता है।

आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर के चारों ओर एक प्रकार का प्रभामंडल होता है, जो वास्तव में शरीर के अंदर होने वाली जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं के परिणामस्वरूप बनाया गया एक चुंबकीय क्षेत्र है। रंगों में एक प्रकार की कंपन ऊर्जा पाई जाती है, जो स्वास्थ्य संबंधी विकारों के विभिन्न प्रकार के इलाज हेतु इस चुंबकीय क्षेत्र के साथ अंतक्रिया करती है। यह कंपन ऊर्ज़ा भीतर के ऊर्जा-संचलन को बहाल करने के लिए जैव रासायनिक प्रतिक्रियाएँ करती है।
कलर थेरेपी आजकल भावनात्मक और शारीरिक रोगों के उपचार तथा मानसिक रोगियों को विशेष रूप से ठीक करने के लिए इलाज का एक लोकप्रिय विकल्प बनता जा रहा है।

अपने विशिष्ट गुणों की वजह से प्रत्येक रंग का हमारे शरीर में अलग शारीरिक असर पड़ता है , उदाहरण के लिए, हरे रंग में एक संतुलनकारी प्रभाव पाया जाता है, इसलिए जब इसे थाइमस ग्रंथि पर टारगेट किया जाता है तो यह टी-सेल उत्पादन को विनियमित करने में मदद करता है पर जब इसे ट्यूमरों पर टारगेट करते हैं तो इसका प्रतिकूल प्रभाव लक्षित होता है।

नारंगी रंग से जहाँ पेशियों में सूजन बढ़ जाती है, जबकि बैंगनी से मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है। जाहिर है, रंगों के विभिन्न प्रकार के संयोजनों का भी रोगों के इलाज में उपयोग किया जाता है, उदाहरण के लिए हरे, नीले और नारंगी का संयोजन गठिया के इलाज हेतु प्रयोग किया जाता है, हरे और पीले रंग का संयोजन मधुमेह के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है, बैंगनी और नीले रंग का संयोजन माइग्रेन के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है, लाल, नीला और हरा महिलाओं में बांझपन के लिए उपयोगी है तथा आसमानी और हरा कैंसर के इलाज के लिए है।

इस प्रकार आप देख सकते हैं कि हमारे ऊपर रंगों का विशिष्ट प्रभाव किस तरह काम करता है? वस्तुत: प्रत्येक व्यक्ति रंगों के प्रति अलग तरह की प्रतिक्रिया जाहिर करता है। रोग कुछ और नहीं, सिर्फ़ हमारे शरीर में कहीं पैदा हो चुकी अस्थायी रुकावट या जीवनी-शक्ति की अव्यवस्था है। रंग मानव शरीर में जैव रासायनिक और हार्मोनल प्रक्रियाओं को सक्रिय करने के लिए उत्प्रेरक का कार्य करते हैं, जिससे हमारा स्वास्थ्य पुन: अपनी उत्तम कार्यावस्था में आने लगता है। बीमारी की हालत में जब हमारे शरीर की कोशिकाएँ कमजोर हो जाती हैं तो एक अनुभवी रंग-चिकित्सक द्वारा रंगों का इस तरह प्रयोग किया जाता है कि मद्धिम ढंग से काम कर रही कोशिकाओं को ऊर्जा की एक अतिरिक्त खुराक मिलती है। रंग चिकित्सा कला और विज्ञान दोनों एक साथ है। एक रंग-चिकित्सक को इस बात की गहरी जानकारी होनी चाहिए कि किस बीमारी में किस रंग का कब, कितना और कितनी देर तक इस्तेमाल किया जाना चाहिए जिससे इलाज का वांछित असर प्राप्त हो। अन्यथा इसका दुरुपयोग होने पर प्रतिकूल परिणाम भी मिल सकते हैं।

इसलिए अपने रंग-चिकित्सक के चयन से पूर्व उसकी योग्यता, पूर्व-अनुभव और प्रतिष्ठा आदि की पूरी सावधानी से जाँच-परखकर कर लेवें।